If you want to live in the world, then love working-आर्थिक मंदी से बचाव

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दुनिया में रहना है, तो काम कर प्यारे

आर्थिक मंदी की गाज जिस पर गिरती है, उसके पांव तले जमीन खिसक जाती है। इसके प्रभाव से कोई भी अछूता नहीं रहता है। यह दौर ही कुछ ऐसा है और इसमें आपको फूंक-फूंक कर कदम बढ़ाने की जरूरत है। क्या करें कि महामारी (Covid -19 )के इस दौर में आप पर आर्थिक मंदी की दोहरी मार न पड़े|

अपनी प्राथमिकताओं को तय करें

पिछले कुछ समय से व्हॉट्सएप पर एक खूबसूरत मैसेज फॉरवर्ड हो रहा है कि 2020 जीवित रहने का साल है, लाभ-हानि की चिंता न करें। इस वर्ष और आगे आने वाले कुछ अनिश्चित काल तक ये मंत्र आपके बेहद काम आएगा। आपके महंगे गैजेट्स और बड़े-बड़े ब्रांड को लेकर आपकी दीवानगी पेट की आग शांत नहीं कर सकती। इसलिए अब से जरूरी चीजों को ही अहमियत दें यानी खरीदारी सिर्फ उतनी ही हो, जो जरूरी हो। आने वाला समय बदलाव का समय होगा। काम का ढंग और जीवनशैली सब कुछ तेजी से बदलेगा। खर्चों पर नियंत्रण की जो सीख लॉकडाउन में मिली है, उसे बरकरार रखना होगा। किसी ने खूब कहा कि मुसीबत आई तो पता चला कि हमें कितनी जरूरत थी और हम कितना भोग कर रहे थे। आने वाला बदलाव आपके उन खर्चों में स्वतः कमी ले आएगा, जो न चाहते हुए करने पड़ रहे थे। जानकारों की मानें तो हम सब लगभग 40 प्रतिशत फिजूलखर्ची कर रहे थे।

12 मई शाम 8 बजे, देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री बस एक ही बात पर बल दे रहे थे। वह बात थी, उस पहिये को चलाने की, जिसे जिंदगी की रफ्तार बनाए रखने के लिए लंबे समय से रोककर रखा गया था। वो पहिया है, अर्थव्यवस्था का। प्रधानमंत्री इस बात पर जोर दे रहे थे कि अगर यह पहिया इससे ज्यादा रुका तो जिंदगी की गति और धीमी पड़ जाएगी। ऐशोआराम तो दूर की बात है, लॉकडाउन के इन तीन पड़ावों ने भूख और लाचारी के करीब से दर्शन करा दिए। सिर्फ निकालते रहोगे तो कुबेर का खजाना भी खाली हो जाएगा, इसलिए इस बार का प्रधानमंत्री का संबोधन पूरी तरह से अर्थव्यवस्था पर ही केंद्रित रहा। पर, क्या सिर्फ सरकार की कोशिशों से सब सामान्य हो जाएगा? आप और हम अपनी भूमिका कैसे निभाएंगे? ये गाड़ी अब आगे कैसे बढ़ेगी, ये सवाल भी तो जरूरी हैं। आसानी से समझाया जाए तो गाड़ी पहले गीयर से ही स्टार्ट होगी ना। ज्यादा हड़बड़ी आपको झटका दे जाएगी, इसलिए इस अल्पविराम के बाद अपने आर्थिक निर्णयों को लेते वक्त आपको थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

आर्थिक मंदी से बचाव के लिए अपना बैकअप प्लान बनाये

फर्ज कीजिए कि गाड़ी रेंगनी शुरू हुई ही है कि अचानक फिर से लॉकडाउन जैसी परिस्थितियां बन जाएं। कोरोना का संकट इतनी आसानी से खत्म नहीं होगा। जानकारों की मानें तो आने वाले कुछ माह में यह संकट और बढ़ सकता है। ऐसे में हम सबके लिए बैकअप प्लान लेकर चलना जरूरी है। करीब दो महीना घर पर बैठकर जमा-पूंजी तक हाथ जरूर पहुंचा होगा। इसे बड़ी सीख समझते हुए अपने लिए कम से कम 6 महीने का बैकअप प्लान तैयार करें। जिससे आगे किसी भी संकट काल में आपको लाभ मिल सके।

आगे के लिए बचत है जरूरी

मनी बैकअप आपको बचत की आदत से ही मिलेगा। बेटा पैसा बचाकर चलो, अकसर आपके पिता या कोई और उम्रदराज आपको ये सलाह देते होंगे। बड़ों की कोई भी नसीहत फिजूल नहीं होती। आपके घर में इसका साक्षात उदाहरण आपकी मां हैं। जिनके बचाए पैसे तब काम आते हैं, जब सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं।बचत के लिए आपको सिर्फ एक फॉर्मूला याद करना होगा, 30:70।यानी आय या लाभ का तीस प्रतिशत पहले ही बचत में डाल देना है। बचे हुए 70 प्रतिशत को खर्च के लिए रखें।

अभी कर्ज से करें तौबा

आर्थिक मंदी में इस बार सैलरी कम आई है, ईएमआई अगले महीने भर देंगे। इस सोच को यहीं थाम लें। आपकी ईएमआई या किसी भी तरह की आर्थिक जिम्मेदारी कम नहीं होने वाली है, इसलिए इन्हें बोझ न बनाएं। समय पर अपने सभी भुगतान पूरे करें। साथ ही अब से तभी सामान खरीदें जब आप उन्हें खरीदने में सक्षम हों। हर छोटी-बड़ी चीज के लिए ईएमआई का सहारा आपकी जरूरतों पर कैंची चला सकता है।

जानकारों का मानना है कि वर्क फ्रॉम होम की परंपरा जारी रहेगी, जो आर्थिक जगत में तमाम तब्दीलियां करेगी। महामारी के चलते रियल एस्टेट, टूरिज्म और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्र में मायूसी देखने को मिल सकती है। शोरूम कल्चर में गिरावट भी आ सकती है। यह दौर कितना लंबा खिचेगा, कहा नहीं जा सकता, लेकिन एक दरवाजा बंद हो तो दूसरा खुल जाता है। चुनौतियां नए अवसर भी लाती हैं। इस दौरान आप भी रोजगार के ऐसे अवसरों की तलाश करें। सर्विस सेक्टर में आपको लाभ मिलेगा। व्यापार के तरीकों में भी बदलाव की दरकार होगी। लोग डरे हैं, इसलिए ज्यादा बाहर नहीं निकलेंगे। आप ऑनलाइन साधनों की ओर रुख कर सकती हैं। होम डिलीवरी, ऑनलाइन ट्यूशन जैसे कई विकल्प हैं। सप्लाई चेन पर खास ध्यान दिया जाएगा, इसलिए आप इस ओर भी रुख कर सकती हैं। लघु उद्योगों में भी आपको ढेरों अवसर मिलने वाले हैं। हम पुरानी डायरी का नया पन्ना शुरू कर रहे हैं, इसलिए आपका तरीका और आइडिया जितना नएपन से भरा होगा, उसे उतनी स्वीकृति मिलेगी। इस दौरान लोगों की मूल आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अगर जरूरत पड़ रही है तो अपने लिए रोजगार के नए अवसर तलाशें।

आर्थिक मंदी के समय सोच समझ कर करें निवेश

आर्थिक मंदी में इस वक्त लाभ-हानि पर ज्यादा चिंतन नहीं किया जा सकता क्योंकि ये अनिश्चितता का दौर है। जानकारों के अनुसार कोरोना की वैक्सीन आने में अभी वक्त लगेगा, इसलिए पैसा कितना बहाना है और कितना संचित करना है, इसका फैसला सोच-समझकर करना होगा। किसी भी निर्णय को लेने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति का अवलोकन गंभीरता से करें, आर्थिक सलाहकारों से परामर्श लेने से पीछे न रहें। आपका पहले से काफी धन निवेश में लगा होगा। ऐसे में घबराकर या किसी भी हड़बड़ी में कोई फैसला न लें। निवेश सरकारी तंत्र पर किया है तो चिंता की बात नहीं, उसे वैसे ही बना रहने दें। अगर शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड आदि में निवेश किया है तो अपनी स्थिति का अवलोकन करना जरूरी है। अगर आप लाभ की स्थिति में हैं तो पैसा निकालकर कहीं और निवेश कर सकती हैं। हानि की स्थिति है, तो आपको धैर्य से काम लेना होगा। आने वाले कुछ समय तक रियल एस्टेट, आदि में पैसा लगाने से बचें। इस दौरान निवेश करना चाहती हैं तो आप पोस्ट ऑफिस, बैंक या सरकारी गोल्ड बॉण्ड की ओर रुख कर सकती हैं। इसके अलावा सोने-चांदी पर निवेश भी आपको फायदा देगा। उठापटक के साथ इनके भाव दो साल में दोगुने होने की संभावना है। जरूरत के लिए ऑटोमोबाइल पर पैसा लगा सकती हैं। घर खरीदने के लिए यह उपयुक्त समय है।

• हेल्थ सेक्टर में भी निवेश किया जा सकता है।

• पैसे को कन्वर्ट करें, उसे पूरी तरह बाजार से हटाएं नहीं।

• निवेश करते वक्त कम से कम दो साल समयअवधि रखें।

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